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ایک گیت جنم اشٹمی کے موقع پر —- تبسم فاطمه

Tabassum Fatima
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दोनों भाषाओं में
شیام کہاں ہو میرے
ایک گیت جنم اشٹمی کے موقع پر
—- تبسم فاطمه
اب رادھا نہ رکمنی
توڑت ہوں میں گگری
شیام کہاں ہو میرے
شیتل جل پر میں نے دیکھا سرخ ابلتا خون
انگاروں سے دھوپ تھی نکلی اور مہینہ جون
ا سروں کو سڑکوں پر دیکھا ، ہاتھ میں تھا ترشول —– ( راکشس )
من میں جتنا پیار رکھا تھا ، گئی میں سب کچھ بھول
خالی ہاتھ جگت نندنی
اب رادھا نہ رکمنی
گائے کون چرائے بن میں ، گائے بھیی ناسور
دودھ دہی سب بھول آیی میں ، آج بہت رنجور
دیوی دیوتا روٹھ گئے سب ، کلیگ کا دستور
دیش کی ہے اب اگنی پریکشا ، سب ہی ہیں مجبور
چاروں اور ہے سنسنی
اب رادھا نہ رکمنی
مندر مندر کھیل ہو وت ہے ، کانہا ہوئے کافور
رام چلے بن واس پہ اپنے ، پھر سے استنا پور
شیام کی گین چوری ہو گئی ، دکھ سے ہو گئی چور
بھگوت گیتا بھول کے سارے بن گئے ہیں اب بھوت
گیت پریت نہ بندنی
اب رادھا نہ رکمنی
توڑت ہوں میں گگری
شیام کہاں ہو میرے

श्याम कहाँ हो मेरे ?
जनम अष्टमी के अवसर पर एक गीत

—- तबस्सुम फातिमा

अब राधा, ना रुक्मणि
तोडत हूँ मैं गगरी
श्याम कहाँ हो मेरे ?
मैंने शीतल जल पर देखा सुर्ख उबलता खून
अंगारों से धुप थी निकली और महीना जून
असुरों को सड़कों पर देखा , हाथ में था त्रिशूल
मन में जितना प्यार रखा था, गयी मैं सबकुछ भूल
खाली हाथ जगत नंदनी
अब राधा, ना रुक्मणि
गाय कौन चराये बन में गाय भई नासूर
दूध दही सब भूल गयी मैं , आज बहुत रंजूर
देवी-देवता रूठ गए सब , कलियुग का दस्तूर
देश की है अब अग्नि परीक्षा है, सब ही हैं मजबूर
चारों ओर है सनसनी
अब राधा रुक्मणी
मंदिर मंदिर खेल होवत है , कान्हा हुए काफूर
राम चले बनवास पे अपने फिर से अस्तिना पुर
श्याम की गैयन चोरी हो गयी , दुःख से हो गयी चूर
भगवद गीता भूल के सारे बन गए हैं अब भूत
गीत , प्रीत ना बंदिनी
अब राधा, ना रुक्मणि
तोडत हूँ मैं गगरी
श्याम कहाँ हो मेरे ?

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