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आने वाली मुश्किलों के बीच भारत ने लगाई गेहूं निर्यात पर रोक

 

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में आने वाली मुश्किलों के बीच भारत ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है।

भारत के पूर्व वित्तमंत्री ने पी चिदंबरम ने गेहूं के निर्यात पर रोक को किसान विरोधी बताया है।

उन्होंने शनिवार को कहा केन्द्र सरकार पर्याप्त मात्रा में गेहूं की ख़रीद नहीं कर सकी इसीलिए उसे इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। चिदंबरम के अनुसार देश में गेहूं का उत्पादन कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ा है। अगर गेहूं की सही ख़रीद हुई होती तो सरकार को इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाना नहीं पड़ता।

भारत के पूर्व वित्तमंत्री ने इस देश की वर्तमान आर्थिक स्थति को अति चिंतनीय बताया। उन्होंने कहा कि मंहगाई बहुत अधिक बढ़ गई है जो सरकार की ग़लत नीतियों के कारण हो रहा है। पी चिदंबरम ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा ग़लत तरीक़े से जीएसटी लागू करने के परिणाम सबके सामने हैं और इसी कारण लोगों को मंहगाई की मार झेलना पड़ रही है।

लगातार मंहगे हो रहे गेहूं के कारण बाज़ार में आंटे की क़ीमत बढ़ती जा रही है। हालात को देखते हुए आगामी दिनों में गेहूं के मूल्यों में तेज़ी की उम्मीद जताई जा रही है। इसी बीच भारत की सरकार ने गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

आधिकारिक नोटोफिकेशन के अनुसार देश में बढ़ती गेहूं के मूल्यों को नियंत्रित करने के लिए इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि इस नए आदेश से पहले भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि चालू वित्त वर्ष के दौरान देश का गेहू निर्यात 100 लाख टन से बढ़कर 125 लाख टन को पार कर सकता है। वित्तवर्ष 2021-22 में भारत ने 69 देशों को 78.5 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था।

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