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पंडित जितेन्द्र त्यागी के भाषण की भाषा भड़काऊ थी, उसका उद्देश्य युद्ध छेड़ना और पैग़म्बरे इस्लाम का अपमान करना था : कोर्ट

 

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न स्थानों पर धर्म संसद जैसे कार्यक्रमों के आयोजन पर चिंता जताई जो कथित तौर पर सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ रहे हैं।

जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि इससे पहले कि वे दूसरों को जागरूक बनने के लिए कहें, उन्हें पहले खुद को संवेदनशील बनाना होगा, उन्हें संवेदनशील नहीं बनाया गया है, इससे पूरा माहौल खराब हो रहा है।

पीठ ने हरिद्वार धर्म संसद मामले में मुसलमानों के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़े एक आरोपी की ज़मानत याचिका पर उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगते हुए यह टिप्पणी की।

पीठ ने जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ़ ​​वसीम रिज़वी की ज़मानत याचिका पर राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। त्यागी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उन्होंने ऐसे वीडियो देखे हैं, जहां भगवा कपड़ों में लोग एकत्र हुए और भाषण दिए।

लूथरा ने कहा कि त्यागी लगभग छह महीने से हिरासत में हैं और वह कई बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि त्यागी के ख़िलाफ़ दर्ज मामले में अधिकतम सज़ा तीन साल है।

शिकायतकर्ता के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि त्यागी यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें क़ानून का भय नहीं है।

इस साल मार्च में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद त्यागी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार धर्म संसद मामले में जितेंद्र त्यागी उर्फ़ वसीम रिज़वी को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि त्यागी के भाषण की भाषा भड़काऊ थी, जिसका उद्देश्य युद्ध छेड़ना, आपसी दुश्मनी को बढ़ावा देना और पैग़म्बरे इस्लाम का अपमान करना था।

हरिद्वार निवासी नदीम अली की शिकायत पर दो जनवरी 2022 को त्यागी व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

जनवरी 2022 को हरिद्वार की एक स्थानीय अदालत ने धर्म संसद के दौरान पैग़म्बरे इस्लाम (स) के ख़िलाफ़ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी जितेंद्र त्यागी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा इस ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया था जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ खुलकर नफरत भरे भाषण दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था।

हरिद्वार धर्म संसद मामले में नरसिंहानंद को 7 फ़रवरी को जमानत मिल गई थी, लेकिन अन्य लंबित मामलों के कारण उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया था। हरिद्वार की एक स्थानीय अदालत से बीते 17 फ़रवरी को ज़मानत मिलने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।

मामले में 15 लोगों के ख़िलाफ दो एफ़आईआर दर्ज की गई, इस आयोजन का वीडियो वायरल होने पर मचे विवाद के ​बाद 23 दिसम्बर 2021 को इस संबंध में पहली एफ़आईआर दर्ज़ की गई थी, जिसमें सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था।

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